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संपादकीय: परीक्षा- डर नहीं, आत्मविश्वास की परीक्षा

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  संपादकीय: परीक्षा- डर नहीं, आत्मविश्वास की परीक्षा परीक्षा का समय आते ही बच्चों के चेहरे पर चिंता साफ दिखाई देने लगती है। किसी को सिलेबस पूरा न होने का डर सताता है, किसी को समय की कमी परेशान करती है, तो किसी पर अपेक्षाओं का बोझ भारी पड़ता है। लेकिन यह समझना आवश्यक है कि परीक्षा केवल उत्तर लिखने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह धैर्य, आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास की भी परीक्षा होती है। हर बच्चा अपने-अपने तरीके से संघर्ष करता है-कोई आर्थिक तंगी से, कोई संसाधनों की कमी से, तो कोई अपने भीतर के डर से लड़ता रहता है। ऐसे समय में सबसे ज़रूरी है कि बच्चे स्वयं पर भरोसा रखें। जो पढ़ा है, वही काम आएगा-इसलिए आख़िरी दिनों में घबराकर नई किताबें उठाने के बजाय पढ़ी हुई सामग्री का शांत मन से दोहराव करें। रोज़ थोड़ा-थोड़ा पढ़ना, छोटे लक्ष्य बनाना और उन्हें पूरा करना मन को स्थिर रखता है। याद रखें, पढ़ाई में निरंतरता अक्सर बड़े परिणाम लेकर आती है। कई बच्चे ऐसे भी होते हैं जो घर की कठिन परिस्थितियों, काम के दबाव या सीमित साधनों के बीच पढ़ाई करते हैं। उनका संघर्ष अक्सर दिखाई नहीं देता, लेकिन उनकी मेहन...