संपादकीय: परीक्षा- डर नहीं, आत्मविश्वास की परीक्षा
संपादकीय: परीक्षा- डर नहीं, आत्मविश्वास की परीक्षा
परीक्षा का समय आते ही बच्चों के चेहरे पर चिंता साफ दिखाई देने लगती है। किसी को सिलेबस पूरा न होने का डर सताता है, किसी को समय की कमी परेशान करती है, तो किसी पर अपेक्षाओं का बोझ भारी पड़ता है। लेकिन यह समझना आवश्यक है कि परीक्षा केवल उत्तर लिखने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह धैर्य, आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास की भी परीक्षा होती है। हर बच्चा अपने-अपने तरीके से संघर्ष करता है-कोई आर्थिक तंगी से, कोई संसाधनों की कमी से, तो कोई अपने भीतर के डर से लड़ता रहता है।
ऐसे समय में सबसे ज़रूरी है कि बच्चे स्वयं पर भरोसा रखें। जो पढ़ा है, वही काम आएगा-इसलिए आख़िरी दिनों में घबराकर नई किताबें उठाने के बजाय पढ़ी हुई सामग्री का शांत मन से दोहराव करें। रोज़ थोड़ा-थोड़ा पढ़ना, छोटे लक्ष्य बनाना और उन्हें पूरा करना मन को स्थिर रखता है। याद रखें, पढ़ाई में निरंतरता अक्सर बड़े परिणाम लेकर आती है।
कई बच्चे ऐसे भी होते हैं जो घर की कठिन परिस्थितियों, काम के दबाव या सीमित साधनों के बीच पढ़ाई करते हैं। उनका संघर्ष अक्सर दिखाई नहीं देता, लेकिन उनकी मेहनत किसी से कम नहीं होती। परीक्षा उनके लिए केवल प्रश्नपत्र नहीं होती, बल्कि भविष्य को बेहतर बनाने की एक उम्मीद होती है। ऐसे समय में सकारात्मक सोच, परिवार का भरोसा और स्वयं की हिम्मत उनकी सबसे बड़ी ताकत बन जाती है।
परीक्षा के दिनों में शरीर और मन-दोनों का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। पर्याप्त नींद लें, हल्का और पौष्टिक भोजन करें तथा अपनी तुलना दूसरों से न करें। हर बच्चा अलग है-उसकी सीखने की गति अलग है और उसकी क्षमता भी अलग। परीक्षा किसी की काबिलियत का अंतिम पैमाना नहीं होती, बल्कि यह सीखने की लंबी यात्रा का एक पड़ाव मात्र है।
अंत में यही कहना है कि परीक्षा को बोझ नहीं, एक अवसर के रूप में देखें। यह अवसर है स्वयं को परखने का, अपनी कमियों को पहचानने का और आगे बेहतर करने का। परिणाम चाहे जैसा भी हो, सच्ची जीत वही है जो ईमानदार प्रयास और सकारात्मक सोच से मिलती है। आत्मविश्वास, धैर्य और संतुलन-यही परीक्षा के समय सबसे बड़े सहायक हैं।
इस अंक में परीक्षा से संबंधित लेख आपको बच्चों, उनके अभिभावकों एवं विद्यालय की ओर से प्राप्त होंगे। ये लेख परीक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों के साथ-साथ अनुभव, सुझाव और सकारात्मक विचार भी प्रस्तुत करेंगे। हमें विश्वास है कि यह विशेषांक सभी पाठकों के लिए उपयोगी सिद्ध होगा और परीक्षा के समय आत्मविश्वास, समझ तथा मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायक बनेगा।
परीक्षा आएगी और चली जाएगी, लेकिन संघर्ष से मिली हिम्मत जीवन भर साथ रहती है।
- संपादक
दीपक बरनवाल, पटना
बरनवाल डायरेक्ट्री, जनवरी -2026, परीक्षा विशेषांक
ई-पत्रिका डाउनलोड लिंक
सम्पादक - दीपक बरनवाल, 093344 53602

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें