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दिसंबर, 2025 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

सुनील वर्णवाल ने पद और गोपनीयता की शपथ ग्रहण

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 सुनील वर्णवाल ने पद और गोपनीयता की शपथ ग्रहण दिनांक 8 दिसंबर 2025 को जमुई के महावीर वाटिका में आयोजित  जमुई चैंबर ऑफ कॉमर्स के चुनाव में अध्यक्ष पद पर विजयी हुए सुनील वर्णवाल ने पद और गोपनीयता की शपथ ग्रहण की। शपथ ग्रहण समारोह में बिहार सरकार की माननीय मंत्री श्रेयसी सिंह, जमुई के अनुमंडल पदाधिकारी, तथा बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष उपस्थित रहे। इस अवसर पर चुनाव पदाधिकारी जयप्रकाश बरनवाल, अनिल बरनवाल, राजेश बरनवाल, दामोदर प्रसाद बरनवाल, ब्रजेश बरनवाल तथा अन्य सभी सम्मानित सदस्य और साथीगण भी मौजूद रहे। बरनवाल डायरेक्ट्री

Featured Research Presenter के रूप में चयनित होने पर डॉ अंजली बरनवाल को हार्दिक बधाई

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 #Duke_Cancer_Institute के 2025 Scientific Retreat में Featured Research Presenter के रूप में चयनित होने पर डॉ अंजली बरनवाल को हार्दिक बधाई। आपकी यह उपलब्धि पूरे बरनवाल समाज के लिए गर्व का क्षण है।  आप जैसी बेटियाँ समाज की प्रेरणा होती हैं और अन्य बेटियों में भी आगे बढ़ने का उत्साह जगाती हैं। #बरनवाल_डायरेक्ट्री परिवार आपकी सफलता पर बेहद प्रसन्न है और आपको उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ देता है।

भारत के लोकतंत्र को झकझोर देने वाला एक नागरिक- अनूप बरनवाल

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 भारत के लोकतंत्र को झकझोर देने वाला एक नागरिक- अनूप बरनवाल अनूप बरनवाल का नाम मार्च 2023 में तब राष्ट्रीय चर्चा में आया, जब उनकी दाख़िल एक याचिका ने भारत के चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को लेकर देशव्यापी बहस खड़ी कर दी। यह मामला सिर्फ़ एक कानूनी तकनीकी मुद्दा नहीं था, बल्कि लोकतंत्र के उस मूल प्रश्न से जुड़ा था कि क्या चुनाव आयोग वास्तव में स्वतंत्र है, जब उसके शीर्ष पदों पर नियुक्ति करने की पूरी शक्ति कार्यपालिका के पास रहती है। उनकी याचिका ने संविधान के अनुच्छेद 324(2) में मौजूद उस खालीपन की ओर इशारा किया, जहाँ कहा तो गया था कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति एक कानून द्वारा तय होगी, लेकिन स्वतंत्रता के 75 वर्षों बाद भी वह कानून कभी बनाया ही नहीं गया। इस कानूनी शून्य का परिणाम यह था कि प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति बिना किसी पारदर्शी प्रक्रिया के चुनाव आयुक्त नियुक्त कर देते थे। यही स्थिति चुनाव आयोग की निष्पक्षता के लिए सबसे बड़ा खतरा थी। अनूप बरनवाल ने एक सामान्य नागरिक होते हुए भी वह सवाल उठाया, जिसे उठाने की हिम्मत बड़े-बड़े राजनीतिक और संवैधानिक विशेषज्ञ भी नहीं दिखाते। उन्होंन...

बरनवाल समाज का बिहार चुनाव में हाल - गलती किसकी....गलत कौन......यह चिंतन का विषय

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 छोटी-बड़ी बहुत सारी चुनाव के परिणाम के बाद कि मन:स्थिति को नजदीक से महसूस किया।  अपने समाज के नेताजी की एक खासियत:- चुनाव जीत गये तो उसका श्रेय स्वजातीय बंधुओं (समाज) को नहीं देते लेकिन चुनाव हार जाते हैं तो वे यह कहते दिखाई देते हैं कि समाज के लोगों ने सपोर्ट ही नहीं किया!  आप सभी ऐसे शब्दों से,ऐसे लफ़्ज़ों को सुन चुके होंगे।  गुप्त मतदान की चुनावी प्रक्रिया में एक नेता का ऐसा दावा क्या विश्वसनीय है❓  एक उदाहरण से इसे समझना चाहिए -- किसी क्षेत्र में कुल मतदाता एक लाख है जिसमें बरनवाल मतदाताओं की संख्या बीस हजार। किसी बरनवाल नेता को कुल बत्तीस हजार मत प्राप्त हुए और वह हार जाता है।  नेताजी,अपनी हार का ठीकरा कैसे और कहां फोड़ते हैं, ये देखिए.... मुझे अपने स्वजातीय बंधुओं का सहयोग नहीं मिला, इसलिए मैं हार गया ।  बतलाइए कि नेताजी का यह कहना उचित है क्या कि समाज के लोगों ने उन्हें सपोर्ट ही नहीं किया ❓  जो वोट उन्हें मिली, क्या वे सारे के सारे गैर जातीय वोट ही थे.... इस दावे का आधार क्या❓ सभी मतदाताओं के द्वारा की गयी व्यक्तिगत मतदान की वीडियो रिकॉर्...